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‘हिरासत में हिंसा और मौत सिस्टम पर धब्बा’:Supreme Court

कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, खुद की PIL पर सुनवाई शुरू

शीर्ष कोर्ट की सख्त टिप्पणी- देश नहीं करेगा बर्दाश्त

“Supreme Court On Custodial Violence And Death”
➡️ “हिरासत में हिंसा और मौत पर सुप्रीम कोर्ट”

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस हिरासत में हिंसा और मौतों पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस हिरासत में हिंसा और मौतें सिस्टम पर धब्बा है और देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। फिलहाल कोर्ट इस पर अब 16 दिसंबर को सुनवाई करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस हिरासत में हिंसा और मौतें हमारी व्यवस्था पर एक ‘बड़ा दाग’ हैं और देश अब इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हिरासत में मौत को कोई भी व्यक्ति सही नहीं ठहरा सकता। लेकिन कोर्ट इस बात से नाराज हुआ कि केंद्र सरकार ने अब तक अपना अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं किया है। अदालत ने इस पर तीखा सवाल किया और पूछा ‘केंद्र सरकार इस अदालत को हल्के में क्यों ले रही है?’ इसके बाद केंद्र ने तीन हफ्ते के भीतर हलफनामा देने का वादा किया।

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कमी को लेकर स्वत संज्ञान जनहित याचिका पंजीकृत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने 2018 में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था। 

CCTV लगाने के पुराने आदेश और धीमी प्रगति

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 और 2020 में आदेश दिया था कि, सभी पुलिस थानों, सीबीआई, ईडी, एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियों के दफ्तरों में फुल कवरेज वाले सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग सिस्टम लगाएं। लेकिन कोर्ट को बताया गया कि, केवल 11 राज्यों ने ही अब तक अपनी रिपोर्ट दाखिल की है। कई राज्य और केंद्र के कई विभागों ने अब तक कोई जानकारी नहीं दी। तीन केंद्रीय एजेंसियों में सीसीटीवी लग चुके हैं, लेकिन बाकी अभी भी पीछे हैं।

कोर्ट की सख्त चेतावनी

कोर्ट ने आदेश दिया, जो राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अभी तक रिपोर्ट नहीं दे पाए हैं, उन्हें तीन हफ्तों में हर हाल में अपनी जानकारी देनी होगी। अगर रिपोर्ट नहीं दी गई, तो उन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के गृह विभाग के प्रमुख सचिव को कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। केंद्र से कोर्ट ने कहा कि यदि केंद्रीय एजेंसियों ने पालन नहीं किया तो उनके निदेशक को बुलाया जाएगा। कोर्ट ने पूरे मामले को 16 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध किया है। तब तक सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्र को अपनी-अपनी रिपोर्ट हर हाल में जमा करनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश की तारीफ
वहीं शीर्ष कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश ने बेहद अच्छा काम किया है, हर पुलिस स्टेशन और चौकी को डिस्ट्रिक्ट कंट्रोल रूम से लाइव जोड़ा गया है।

केंद्र सरकार को भी दिया था निर्देश

शीर्ष अदालत केंद्र सरकार को भी सीबीआई, ईडी और एनआईए सहित जांच एजेंसियों के कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे एवं रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक पुलिस स्टेशन, सभी प्रवेश और निकास के स्थानों, मुख्य द्वार, लॉक-अप, गलियारों, लाबी और रिसेप्शन के साथ-साथ लाक-अप रूम के बाहर के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि कोई भी हिस्सा कवरेज से बाहर न रहे।

शीर्ष अदालत ने था कि सीसीटीवी सिस्टम, नाइट विजन से लैस होने चाहिए और इसमें आडियो के साथ-साथ वीडियो फुटेज भी होनी चाहिए। केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ऐसे सिस्टम खरीदना अनिवार्य होगा जिनमें कम से कम एक वर्ष के लिए डाटा संग्रहीत करने की क्षमता हो।



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