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गुजरात (नागरिक सेवा का अधिकार) अधिनियम, 2013 का उपयोग क्या जनता कर रही हैं या अधिकारी सिर्फ अपना मनमानी कर रहे हैं ?

गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेन्द्र मोदी भले ही आज भारत के प्रधानमंत्री बने हैं लेकिन गुजरात की जनता के लिये एक यह कानून २०१३ में बना दिया था जिसमें नागरिक सेवा का अधिकार अधिनियम -२०१३ से प्ररित किया गया था.

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की लोकायुक्त नियुक्त करने की अपील को भले नजरअंदाज कर रहे हों लेकिन सिटीजन चार्टर नागरिक सेवा अधिकार लागू कर प्रशासन को और चुस्त- दुरुस्त बनाना चाहते हैं।

गुजरात में नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री के समय वित्तमंत्री नितिन पटेल ने [सार्वजनिक सेवा अधिकार कानून] 2013 विधानसभा में पेश किया। पटेल ने विधानसभा में बताया कि गुजरात ने विकास व गुड गवर्नेस के क्षेत्र में बेहतर काम किया है इसके साथ ही प्रशासन में जवाबदेही व पारदर्शिता लाने के इरादे से सरकार ने नागरिक सेवा अधिकार कानून लागू किया है। सरकार राज्य के सभी प्रशासनिक कार्यालयों में शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करेगी।

सरकारी दफ्तर में तय समयसीमा में काम नहीं होने पर शिकायतकर्ता इन अधिकारियों को अथवा जिला व राज्य में सक्षम अधिकारी के समक्ष अपील कर सकेगा। काम में देरी पर शिकायत निवारण अधिकारी को एक हजार से दस हजार तक के जुर्माने का भी इसमें प्रावधान है जो रकम शिकायतकर्ता को मिलेगी।?

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