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फर्जी साक्ष्य लगाने में सीओ समेत 10 पुलिसकर्मी भी फंसे,मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दायर याचिका पर जांच के दिए आदेश

जमीन हथियाने के लिए एक राशन कोटेदार एवं भाजपा नेता द्वारा

चंदौसीः सुबूतों और गवाहों में ‘खेल’ कर कानून को ‘अंधा’ करने की कोशिश अब सीओ समेत 10 पुलिसकर्मियों पर भारी पड़ रही है। जमीन हथियाने के लिए एक राशन कोटेदार एवं भाजपा नेता द्वारा जिन लोगों को फंसाने के लिए दो कंपाउंडरों की मदद से अपनी पीठ में चीरा लगवाकर गोली प्लांट कराए जाने के इस मामले में कोर्ट मामले में पहले ही पीड़ित पक्ष के तीन युवाओं पर दर्ज केस खारिज कर उनकी रिहाई के आदेश दे चुका है। वहीं, अब पीड़ित पक्ष की ओर से दायर याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस-प्रशासन को जांच आख्या जल्द पेश करने के आदेश दिए हैं।

घटनाक्रम के अनुसार पिछले वर्ष 27 जुलाई की रात लगभग 10 बजे डायल 112 को सूचना दी गई कि कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पतरौआ की हद में सैनिक चौराहे के पास गोली मार दी है। सूचना पर पीआरवी व थाना कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई। यहां पता लगा कि 56 वर्षीय प्रेमपाल निवासी मुहल्ला लोधियान भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के नगर अध्यक्ष व राशन डीलर को गोली लगी है। घायल को चंदौसी सीएचसी लाया गया।

यहां से संभल जिला अस्पताल और इसके बाद मुरादाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस को दिए बयान में प्रेमपाल ने बताया था कि वह बहजोई में आयोजित व्यापार मंडल की बैठक में शामिल होकर लौट रहा था कि रास्ते में उसी के मुहल्ला लोधियान निवासी दिलीप एवं हेमंत पुत्रगण भागीरथ तथा श्यामलाल पुत्र रामचंद्र ने रास्ते में घेरकर उसे गोली मार दी।

प्रेमपाल के भाई से तहरीर लेकर पुलिस ने तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर रात में ही तोनों को घर में सोते समय उठा लिया और तमंचा लगाकर उनका चालान कर दिया। पुलिस अधीक्षक ने भी गोली मारने की घटना का पर्दाफाश होने का बयान जारी कर दिया था। हालांकि पहले दिन से पूरे शहर में चर्चा थी कि तीनों लोगों को निर्दोष फंसाया गया है। स्वजन की ओर से अफसरों से निष्पक्ष जांच कराने की लगातार गुहार की जाती रही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद दिलीप व हेमंत की मां उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दरबार में पहुंच गई और अपनी व्यथा उनके सामने रखी और निर्दोष बेटों को बचाने की गुहार की।

गोली प्लांट कराने का मामला तीनों युक्कों का केस छह सितंबर को हुआ था खारिज

डीआइजी भी मांग चुके मामले की रिपोर्ट.

मामला संज्ञान में आने के बाद करीब एक महीने पहले डीआइजी ने भी पूरी जांच की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि पुलिस महकमे के अफसरों ने यह रिपोर्ट अभी तक डीआइजी को नहीं सौंपी।

ऐसे पकड़ा खेल

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आदेश पर दोवारा जांच में असलियत खुली। इसके बाद पुलिस ने खुद को घायल करने का षड्यंत्र रचने और निर्दोषों को हत्या के प्रयास में फंसाने के आरोप में भाजपा नेता प्रेमपाल, कंपाउंडर आमिर अली, निवासी रहोली थाना कुढ़ फतेहगढ़, शराफत ग्राम नगला पुरवा थाना कुढ़ फतेहगढ़ तथा राहुल वाल्मीकि निवासी वैरीखेड़ा थाना बनियाटेर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया था।

तीनों को जेल भेजने के बाद कोतवाली पुलिस सुकून में थी, लेकिन उप मुख्यमंत्री के आदेश पर जब इस मामले की दोबारा विवेचना हुई तो असलियत सामने आई। अब निर्दोष जेल भेजे गए लोगों को रिहा करने के आदेश कोर्ट ने दिए हैं। 

जमीन हथियाने के लिए भाजपा नेता ने ऐसा जाल बुना कि पुलिस भी उसमें फंस गई। दोबारा हुई जांच में जो कहानी सामने आई है, उसके अनुसार दूसरे लोगों को फंसाने के लिए भाजपा नेता ने दो कंपाउंडरों की मदद से अपनी पीट में चीरा लगवाकर गोली डलवाई थी।

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