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सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत जानकारी न देने पर, लोक सूचना अधिकारी (PIO) के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की जा सकती है।

जिनके तहत PIO के खिलाफ FIR दर्ज की जा सकती है

सुचना अधिकार अधिनियम -2005 के तहत माँगी गई जानकारी न देने पर , गलत जानकारी देने पर या अन्य रूप से हेरान-परेशान करने पर IPC & BNS-2023 के तहत कार्यवाही किया जा सकता हैं जो निम्नलिखित धाराओं के तहत क़ानूनी कार्यवाही किया जा सकता हैं. सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत जानकारी न देने पर, लोक सूचना अधिकारी (PIO) के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की जा सकती है। यहाँ कुछ धाराएँ दी गई हैं जिनके तहत PIO के खिलाफ FIR दर्ज की जा सकती है:

**धारा 193, 420, 468 और 471: यदि PIO लिखित में झूठा बयान देता है और आवेदक को सदोष हानि होती है, तो उसके खिलाफ IPC की धारा 193, 420, 468 और 471 के तहत FIR दर्ज की जा सकती है।

भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 229,318,336 व 340 लगेगी।

**धारा 166ए और 167: यदि PIO RTI अधिनियम की धारा 7(8) का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ IPC की धारा 166ए और 167 के तहत FIR दर्ज की जा सकती है।

भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 199 व 201 लगेगी।

**धारा 420, 468 और 471: यदि PIO झूठी जानकारी देता है और आवेदक के पास इसका प्रमाण है, तो उसके खिलाफ IPC की धारा 420, 468 और 471 के तहत FIR दर्ज की जा सकती है।

भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318,336 व 340 लगेगी।

**धारा 188: यदि प्रथम अपीलीय अधिकारी निर्णय नहीं देता है या PIO सूचना नहीं देता है, तो उसके खिलाफ IPC की धारा 188 के तहत FIR दर्ज की जा सकती है।

भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 लगेगी।

**धारा 506: यदि PIO या प्रथम अपीलीय अधिकारी आवेदक को धमकाता है, तो उसके खिलाफ IPC की धारा 506 के तहत FIR दर्ज की जा सकती है।

भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 351 लगेगी।

धारा 406 और 420: यदि PIO शुल्क लेकर भी सूचना नहीं देता है, तो उसके खिलाफ IPC की धारा 406 और 420 के तहत FIR दर्ज की जा सकती है।

भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 316 व 318 लगेगी।

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