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Legal Ambit ने गुजरात और तमिलनाडु की घटना पर फरियाद पर NHRC ने चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकेन रिपोर्ट) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गुजरात और तमिलनाडु राज्य नोटिस जारी किया है

गुजरात घटनाक्रम:गुजरात के पटाखा फैक्ट्री विस्फोट पर एनएचआरसी सख़्त, ली संज्ञान – 18 मज़दूरों की मौत पर गुजरात श्रमायुक्त और पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट तलब।

नई दिल्ली/गांधीनगर। पटाखा फैक्ट्री में हुए दर्दनाक हादसे को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गंभीर रुख अपनाते हुए गुजरात के श्रमायुक्त और बनासकांठा/पालनपुर के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकेन रिपोर्ट) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह संज्ञान मानवाधिकार कार्यकर्ता और लीगल एम्बिट महाराष्ट्र के राज्य अध्यक्ष असिफ अबिद खान द्वारा 01 अप्रैल 2025 को दायर की गई शिकायत पर आधारित है, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि गुजरात में एक अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट होने के कारण 18 मजदूरों की मौत हो गई, 03 की हालत गंभीर बनी हुई है, और 05 मजदूरों को मामूली चोटें आई हैं। शिकायत में बताया गया कि फैक्ट्री को केवल पटाखों की बिक्री की अनुमति थी, निर्माण की नहीं। इसके बावजूद निर्माण कार्य चलाया जा रहा था। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि मजदूरों के शवों के अंग 50 मीटर तक बिखरे मिले और मलबा 100 मीटर तक फैल गया। खास बात यह रही कि मज़दूर केवल दो दिन पहले ही वहां काम पर रखे गए थे। आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर हनन मानते हुए धारा 12 के अंतर्गत मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत संज्ञान लिया है। मामले की सुनवाई एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो की पीठ द्वारा की गई, जिन्होंने श्रमायुक्त गुजरात और पालनपुर पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए कि वे उक्त आरोपों की जाँच कर कार्यवाही रिपोर्ट चार सप्ताह में आयोग को प्रस्तुत करें। आयोग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट एचआरसीनेट पोर्टल ((https://hrcnet.nic.in)) के माध्यम से प्रस्तुत की जाए और किसी भी प्रकार की अन्य डिजिटल सामग्री स्पीड पोस्ट या अधिनियम के अनुसार जमा की जाए। यह मामला न केवल कार्यस्थल सुरक्षा की अनदेखी को उजागर करता है, बल्कि संबंधित प्रशासनिक निकायों की जिम्मेदारी और जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है।

तमिलनाडु घटनाक्रम:तमिलनाडु पुलिस कस्टडी में संदिग्ध मौत पर एनएचआरसी सख़्त, पुदुकोट्टई एसपी से रिपोर्ट।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली द्वारा दिनांक: 25 जुलाई 2025 तमिलनाडु के पुदुकोट्टई जिले में पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति की संदिग्ध मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सख़्त रुख अपनाते हुए जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) को नोटिस जारी किया है। आयोग ने इस मामले में चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकेन रिपोर्ट – अत्र) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह मामला लीगल एम्बिट महाराष्ट्र के राज्य अध्यक्ष असिफ अबिद खान द्वारा 25 नवम्बर 2024 को दायर की गई शिकायत पर आधारित है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ड्रग्स के एक मामले में पुदुकोट्टई में 12 अन्य व्यक्तियों के साथ गिरफ्तार किए गए 36 वर्षीय व्यक्ति की हिरासत में मौत हो गई। पुलिस द्वारा उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस मौत को लेकर गहरी आशंका जताई गई है कि यह पुलिसिया अत्याचार और हिरासत में हुई हिंसा का परिणाम हो सकता है। शिकायत में पुलिस की पारदर्शिता की कमी और जवाबदेही की विफलता पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आयोग ने प्रथम दृष्टया इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया है। सुनवाई सदस्य प्रियंक कानूनगो की पीठ द्वारा की गई। आयोग ने पुदुकोट्टई के पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है कि वह इस शिकायत की पूरी जांच कराएं और इसकी रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। यह रिपोर्ट एचआरसीनेट पोर्टल ((https://hrcnet.nic.in)) के माध्यम से जमा करानी होगी। यह मामला पुलिस हिरासत में हो रही मौतों को लेकर देशभर में गूंजते सवालों को एक बार फिर उजागर करता है। पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता, मानवाधिकारों की सुरक्षा और जवाबदेही की आवश्यकता को लेकर यह एक अहम पड़ाव बन सकता हैं।

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