उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के बिलग्राम थाना क्षेत्र के बिरौरी गांव स्थित एक निजी विद्यालय में कक्षा 3 में पढ़ने वाले 10 वर्षीय मासूम छात्र को उसके शिक्षक द्वारा अमानवीय तरीके से प्रताड़ित किए जाने का मामला सामने आया था। आरोप था कि शिक्षक ने बच्चे को ‘मुर्गा’ बनाकर उसके ऊपर ईंट रख दी और जातिसूचक गालियाँ देते हुए क्रूर व्यवहार किया। इस बर्बरता के कारण बच्चे के शरीर पर कई चोटें आई थीं।
शिक्षक द्वारा इस तरह का अमानवीय कृत्य न केवल शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्न उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आज भी गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को समान अधिकार और सुरक्षित वातावरण देने की आवश्यकता कितनी गहरी है। पढ़े-लिखे वर्ग से ऐसी घटनाओं का सामने आना मानवाधिकारों के प्रति गंभीर उपेक्षा को उजागर करता है।
घटना की जानकारी मिलते ही ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन सेल (HRPC) ने तत्काल संज्ञान लेते हुए मामले को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के समक्ष प्रस्तुत किया। HRPC के हस्तक्षेप के बाद जिला अधिकारी ने पूरे प्रकरण की जाँच कराई।
जाँच में आरोप सत्य पाए जाने पर क्रूर शिक्षक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है। प्रशासन ने बच्चे और उसके परिवार को पूर्ण सुरक्षा और न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है।
HRPC ने स्पष्ट कहा है कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा, भेदभाव या अमानवीय व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। HRPC ने NCPCR से ऐसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई और स्कूलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपेक्षा की है।
