आरटीआई एक्ट की धारा 4 (1) (b) में सभी विभागों के लिए 17 बिंदुओं की जानकारी का स्वत: सार्वजनिक प्रकटन करना अनिवार्य किया गया है।
इसके बाद केंद्रीय कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने इसमें आठ और बिंदुओं का समावेश किया है।
अर्थात अब कुल 25 बिंदुओं की जानकारी खुद-ब-खुद सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया गया है।

इसके लिए डीओपीटी ने 7 नवंबर 2019 को केंद्र- राज्य के सभी विभागों को कार्यालय ज्ञापन (ऑफिस मेमोरेंडम) जारी कर दिशा निर्देश दिए हैं।
DOC-20251130-WA0098.પરિપત્ર-આર-ટી-આઈ-ગાઈડલાઈન-ભારત-સરકારइनके तहत अब इन आठ बिंदुओं की जानकारी का भी हर विभाग को स्वत: सार्वजनिक प्रकटन करना होगा –
1- सार्वजनिक खरीद से संबंधित जानकारी ,
2- पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) समझातों से संबंधित जानकारी,
3- स्थानांतरण नीति / स्थानांतरण आदेश,
4- आरटीआई आवेदन और उनके जवाब (बशर्ते कि वे किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित न हों ),
5- राज्यों /स्वयंसेवी संगठनों आदि को विवेकाधीन / गैर विवेकाधीन अनुदान,
6-मंत्रियों / संयुक्त सचिव स्तर और उससे ऊपर के अधिकारियों के आधिकारिक विदेश दौरे,
7- निर्णय लेने की प्रक्रिया / संरचना – बजट आवंटन और
8- ” उपयोगकर्ता परिप्रेक्ष्य ”
के साथ आधिकारिक वेबसाइटों पर प्रकटीकरण।
पूर्व में निर्धारित 16वें बिंदु के तहत लोक सूचना अधिकारियों के नाम, पदनाम और अन्य विवरण स्वत: सार्वजनिक करना भी हर विभाग के लिए अनिवार्य है। 15वें बिंदु के तहत हर विभाग को खुद-ब-खुद सार्वजनिक रूप से यह बताना जरूरी है कि सूचना प्राप्त करने के लिए आने वाले नागरिकों को कार्यालय में क्या सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिसमें सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाए गए पुस्तकालय/ वाचनालय के काम के घंटे शामिल हैं।
- आप किसी भी लोक प्राधिकारी कार्यालय में आरटीआई लगा कर मांग कर सकते हैं कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4(1)(b) के अंतर्गत विभाग द्वारा स्वत: सार्वजनिक की गई 25 बिंदुओं की जानकारी की प्रमाणित प्रतिलिपि प्रदान की जाए।
बिन्दु 7 विशेष सूचना आवेदक की उपस्थिति अनिवार्य नहीं
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