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जागरूक बनें और दूसरों को जागरूक बनाएं,जागरूक उपभोक्ता ही सफल उपभोक्ता

भारत को शोषण-मुक्त राष्ट्र बनाना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। आधुनिक उपभोक्ता युग में जागरूकता ही सबसे बड़ा संरक्षण है। जब उपभोक्ता अपने अधिकारों को जानता है, तभी वह शोषण के विरुद्ध प्रभावी लड़ाई लड़ सकता है।
जागरूक उपभोक्ता ही सफल उपभोक्ता है।
उपभोक्ता संरक्षण कानून का उद्देश्य
उपभोक्ताओं को निम्न समस्याओं से सुरक्षा देना —
दोषपूर्ण वस्तु
घटिया सेवा
अधिक मूल्य वसूली
भ्रामक विज्ञापन
अनुचित व्यापार व्यवहार
भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 लागू किया गया, जिसे बाद में आधुनिक व्यवस्था हेतु उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
*उपभोक्ता आयोग व्यवस्था (Jurisdiction)
आयोग दावा राशि
जिला आयोग
₹50 लाख तक
राज्य आयोग
₹50 लाख – ₹2 करोड़
राष्ट्रीय आयोग
₹2 करोड़ से अधिक
उपभोक्ता के अधिकार
1️⃣ सुरक्षा का अधिकार
खतरनाक वस्तुओं से सुरक्षा।
Case Law:
M.C. Mehta v. Union of India
Case No.: Writ Petition (Civil) No. 12739/1985, Supreme Court
निर्णय:
खतरनाक उद्योगों की पूर्ण जिम्मेदारी तय की गई। उपभोक्ता सुरक्षा सर्वोपरि मानी गई।
उदाहरण:
यदि खराब गैस सिलेंडर से दुर्घटना होती है, कंपनी जिम्मेदार होगी।
2️⃣ सूचना का अधिकार (Right to Information about Product)
Case Law:
Haryana State Agricultural Marketing Board v. Bishamber Dayal
Civil Appeal No. 2991 of 2014, Supreme Court
निर्णय:
सेवा प्रदाता को सही जानकारी देना अनिवार्य है।
उदाहरण:
प्लॉट खरीदते समय छिपाई गई जानकारी = उपभोक्ता धोखाधड़ी।
3️⃣ उचित सेवा पाने का अधिकार
Case Law:
Indian Medical Association v. V.P. Shantha
(1995) 6 SCC 651, Supreme Court
निर्णय:
डॉक्टर और अस्पताल भी उपभोक्ता कानून के अंतर्गत सेवा प्रदाता हैं।
उदाहरण:
गलत ऑपरेशन या लापरवाही पर उपभोक्ता आयोग में शिकायत संभव।
4️⃣ सुनवाई का अधिकार
Case Law:
Lucknow Development Authority v. M.K. Gupta
(1994) 1 SCC 243, Supreme Court
निर्णय:
सरकारी विभाग भी उपभोक्ता कानून के अंतर्गत उत्तरदायी हैं।
उदाहरण:
सरकारी आवास योजना में देरी → मुआवजा देय।
5️⃣ प्रतितोष (Compensation) का अधिकार
Case Law:
Ghaziabad Development Authority v. Balbir Singh
(2004) 5 SCC 65, Supreme Court
निर्णय:
मानसिक पीड़ा और आर्थिक नुकसान दोनों पर मुआवजा दिया जा सकता है।
उदाहरण:
फ्लैट समय पर न मिलने पर ब्याज + क्षतिपूर्ति।
उपभोक्ता के कर्तव्य
उदाहरण
बिल लेना
मोबाइल खराब होने पर बिना बिल शिकायत मुश्किल
गुणवत्ता जांच
एक्सपायरी दवा खरीदना जोखिम
विज्ञापन सत्यापन
“100% गारंटी” दावा हमेशा सही नहीं
प्रमाणित उत्पाद
ISI मार्क बिजली उपकरण सुरक्षित
शिकायत कैसे करें (Practical Process)
पहले विक्रेता को लिखित शिकायत दें।
बिल एवं प्रमाण सुरक्षित रखें।
ऑनलाइन शिकायत: E-Daakhil Portal
जिला/राज्य/राष्ट्रीय आयोग में केस दर्ज करें।
महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत (Courts द्वारा स्थापित)
✔ उपभोक्ता कानून कल्याणकारी (Beneficial Legislation) है।
✔ तकनीकी आधार पर शिकायत खारिज नहीं की जानी चाहिए।
✔ सरकारी विभाग भी जवाबदेह हैं।
✔ मानसिक उत्पीड़न भी क्षतिपूर्ति योग्य है।
निष्कर्ष
जब नागरिक जागरूक बनता है तो —
बाजार ईमानदार बनता है
भ्रष्टाचार कम होता है
सेवा गुणवत्ता बढ़ती है
राष्ट्र मजबूत होता है
इसलिए जागरूक बनें और दूसरों को भी जागरूक बनाएं।
महावीर पारीक
CEO & Founder — Legal Ambit

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