पुलिस स्टेशन में CCTV सिर्फ कैमरा नहीं, मानवाधिकार सुरक्षा का महत्वपूर्ण साक्ष्य; सुप्रीम कोर्ट ने हर थाने की निगरानी, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे
सुप्रीम कोर्ट ने 2 दिसंबर 2020 को Paramvir Singh Saini vs. Baljit Singh मामले में पुलिस स्टेशनों में CCTV व्यवस्था को लेकर विस्तृत निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश के हर पुलिस स्टेशन में CCTV कैमरे, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग तथा निगरानी के लिए State Level Oversight Committee (SLOC) और District Level Oversight Committee (DLOC) की व्यवस्था के निर्देश दिए थे।
कोर्ट के निर्देश के अनुसार CCTV की निगरानी केवल कैमरे लगाने तक सीमित नहीं है। DLOC को पुलिस स्टेशनों में रिकॉर्ड हुए CCTV फुटेज की समीक्षा कर यह देखने की जिम्मेदारी दी गई है कि मानवाधिकार उल्लंघन की कोई घटना हुई हो और वह रिपोर्ट न हुई हो, तो उसका पता लगाया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि CCTV कैमरों में नाइट विजन के साथ ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा हो तथा रिकॉर्डिंग को डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर/नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर में सुरक्षित रखा जाए। कोर्ट ने उपलब्ध तकनीक के अनुसार 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था।
सवाल CCTV की मौजूदगी नहीं, रिकॉर्ड की सुरक्षा और निगरानी पर
यदि किसी पुलिस स्टेशन में CCTV बंद हो, रिकॉर्डिंग उपलब्ध न हो, फुटेज सुरक्षित न रखा गया हो या निगरानी समिति द्वारा उसकी समीक्षा न की गई हो, तो ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण सवाल खड़े होते हैं कि मानवाधिकार संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का संरक्षण कैसे होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि पुलिस स्टेशन में बल प्रयोग से गंभीर चोट अथवा हिरासत में मृत्यु जैसी घटना की शिकायत होने पर संबंधित CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और जांच एजेंसी को उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।
2021 में भी सुप्रीम कोर्ट ने अनुपालन पर जताई थी चिंता
27 जनवरी 2021 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश अनुपालन स्थिति में CCTV की संख्या, उसकी स्थिति, रिकॉर्डिंग/स्टोरेज क्षमता, निगरानी समितियों और बजट सहित कई बिंदुओं पर राज्यों से ठोस अनुपालन की जानकारी मांगी गई थी।
अब बड़ा सवाल:
क्या आज भी प्रत्येक पुलिस स्टेशन में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक CCTV कैमरे कार्यरत हैं?
क्या ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जा रही है?
क्या 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने की व्यवस्था है?
क्या DLOC नियमित रूप से CCTV फुटेज की समीक्षा कर रही है?
और मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत सामने आने पर संबंधित फुटेज तत्काल सुरक्षित किया जाता है?
यही वे सवाल हैं जिनके जवाब पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।