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डीडवाना पंचायत समिति – कोलिया ग्राम पंचायत का गंभीर मामला

डीडवाना पंचायत समिति में मनरेगा घोटाला: मृत महिला को 1 साल 8 माह तक जीवित दर्शाकर भुगतान का खुलासा

🛑 मृत महिला को जीवित दर्शाकर मनरेगा में कार्य व भुगतान — संवैधानिक, वैधानिक व न्यायिक निर्देशों का खुला उल्लंघन

“20 मई 2021 को SMS अस्पताल में मृत घोषित की गई महिला…
सरकारी रिकॉर्ड में 15 जनवरी 2023 तक जीवित!
दो मस्टर रोल, दो MB पेज और मोबाइल से दर्ज हाजिरी —
HC–SC के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत मनरेगा में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है।”

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राजस्थान, कोलिया राजस्थान के नागौर जिले में डीडवाना पंचायत समिति का एक गांव है। यह ग्राम पंचायत मुख्यालय भी है। डीडवाना पंचायत समिति के अधीनस्थ ग्राम पंचायत कोलिया में मनरेगा योजना के क्रियान्वयन को लेकर एक अत्यंत गंभीर, प्रथम दृष्टया आपराधिक और सुनियोजित अनियमितता का मामला सामने आया है। मृत महिला मनोज (पत्नी भरत कुमार, निवासी कोलिया), जिनकी मृत्यु 20 मई 2021 को जयपुर के SMS हॉस्पिटल में हो चुकी थी, उन्हें सरकारी अभिलेखों में दो अलग-अलग मस्टर रोल में 15 जनवरी 2023 तक जीवित दर्शाया गया, और “अपना खेत अपना काम” योजना के अंतर्गत कार्य एवं भुगतान दर्ज किया गया।

डीडवाना पंचायत समिति के कोलिया ग्राम पंचायत में मृत महिला को सरकारी रिकॉर्ड में 15 जनवरी 2023 तक जीवित दिखाकर मनरेगा योजना में कार्य और भुगतान दर्ज किया गया। डिजिटल हाजिरी और दो मस्टर रोल के माध्यम से हुई यह प्रथम दृष्टया आपराधिक अनियमितता, सरकारी धन के दुरुपयोग और जवाबदेही की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है।

डीडवाना पंचायत समिति के अंतर्गत कोलिया ग्राम पंचायत में एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें मृत महिला को सरकारी रिकॉर्ड में जीवित दिखाकर मनरेगा योजना के तहत कार्य एवं भुगतान दर्ज किया गया। यह प्रथम दृष्टया सुनियोजित और आपराधिक लापरवाही का मामला प्रतीत होता है, जो प्रशासनिक, संवैधानिक और न्यायिक निर्देशों के स्पष्ट उल्लंघन की ओर इशारा करता है। मृतक महिला, मनोज (पत्नी भरत कुमार, निवासी कोलिया), जिनका निधन 20 मई 2021 को जयपुर के SMS हॉस्पिटल में हो गया था, उन्हें सरकारी अभिलेखों में 15 जनवरी 2023 तक जीवित दिखाया गया। इस अवधि के दौरान उनके नाम पर “अपना खेत, अपना काम” योजना के अंतर्गत कार्य और भुगतान दर्ज किया गया। रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि दो अलग-अलग मस्टर रोल—संख्या 29033 और 31759—में महिला की हाजिरी मोबाइल आधारित डिजिटल सिस्टम से दर्ज की गई, जिसे “Special Note” में भी स्पष्ट रूप से उजागर किया गया है।

मस्टर रोल संख्या 29033 में 16 दिसंबर 2022 से 31 दिसंबर 2022 तक की अवधि के लिए कार्य दर्ज था, जबकि मस्टर रोल संख्या 31759 में 1 जनवरी 2023 से 15 जनवरी 2023 तक की प्रविष्टि की गई। दोनों रिकॉर्ड में मोबाइल आधारित हाजिरी और डिजिटल सिग्नेचर का उल्लेख विशेष रूप से किया गया है। कानूनी दृष्टिकोण से यह मामला और भी गंभीर है। सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन राज्य और उसके अधिकारियों द्वारा विश्वास के साथ रखा जाता है, और किसी भी प्रकार का दुरुपयोग सार्वजनिक विश्वास का उल्लंघन है। उच्च न्यायालयों के निर्णयों के अनुसार, मृत व्यक्ति के नाम पर भुगतान, फर्जी मस्टर रोल या झूठी रिकॉर्ड प्रविष्टि केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि प्रथम दृष्टया आपराधिक कृत्य है। डिजिटल सिस्टम का दुरुपयोग इस घोटाले को और भी संगठित और गंभीर बनाता है। विशेष रूप से, मृत महिला को 1 वर्ष 8 माह तक जीवित दिखाने, दो अलग-अलग मस्टर रोल और MB पृष्ठों में प्रविष्टि दर्ज करने और मोबाइल आधारित हाजिरी के माध्यम से भुगतान करने की स्थिति, मनरेगा अधिनियम, वित्तीय नियमों और संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 के तहत जवाबदेही के सिद्धांतों के विपरीत है। प्रथम दृष्टया यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग, फर्जी रिकॉर्ड निर्माण, डिजिटल प्रणाली के दुरुपयोग और संभवतः जवाबदेह अधिकारियों की मिलीभगत की ओर संकेत करता है। इस संदर्भ में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतीत होती है।

📌 रिकॉर्ड आधारित तथ्य (Documentary Evidence)

✔ जॉब कार्ड संख्या – RJ 271400203301772501/7303589
✔ कार्य स्थल – भंवरलाल / मांगीलाल का खेत
✔ कार्य प्रकृति – निजी टांका, केटल शेड एवं मेड़बंदी

🔹 मस्टर रोल संख्या 29033

  • अवधि – 16 दिसम्बर 2022 से 31 दिसम्बर 2022
  • MB संख्या – 1695
  • MB पृष्ठ – 86

🔹 मस्टर रोल संख्या 31759

  • अवधि – 1 जनवरी 2023 से 15 जनवरी 2023
  • MB संख्या – 1695
  • MB पृष्ठ – 90

👉 दोनों मस्टर रोल में स्पष्ट “Special Note” दर्ज है —

“Rows Highlighted by Yellow colour indicates attendance has been taken from mobile device.”

अर्थात मृत महिला की हाजिरी मोबाइल आधारित डिजिटल सिस्टम से दर्ज की गई।

⚖️ कानूनी दृष्टिकोण (HC–SC के स्थापित सिद्धांत)

🔹 सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार यह प्रतिपादित किया है कि

“Public money is held in trust by the State and its functionaries, and any misappropriation amounts to breach of public trust.”

🔹 माननीय उच्च न्यायालयों ने मनरेगा मामलों में स्पष्ट कहा है कि —फर्जी मस्टर रोल, मृत व्यक्ति के नाम भुगतान, या रिकॉर्ड में झूठी प्रविष्टि, केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि प्रथम दृष्टया आपराधिक कृत्य है।

🔹 SC के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार —
✔ मृत व्यक्ति के नाम पर भुगतान = धोखाधड़ी (Fraud)
✔ फर्जी रिकॉर्ड = जालसाजी (Forgery)
✔ डिजिटल सिस्टम का दुरुपयोग = विश्वासघात व साजिश

👉 न्यायालयों का स्पष्ट मत है कि
“Fraud vitiates everything”
अर्थात धोखाधड़ी से किया गया कोई भी प्रशासनिक कार्य वैध नहीं रह जाता।

⚠️ मामले की गंभीरता क्यों बढ़ जाती है?

✔ मृत महिला को 1 वर्ष 8 माह तक जीवित दिखाया गया
✔ दो मस्टर रोल + MB रिकॉर्ड में प्रविष्टि
✔ मोबाइल आधारित हाजिरी (Digital Attendance)
✔ यानी यह कृत्य सिर्फ कागजी नहीं, तकनीकी सिस्टम के दुरुपयोग से किया गया

यह स्थिति मनरेगा अधिनियम, वित्तीय नियमों, और संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 के तहत जवाबदेही के सिद्धांतों के विपरीत है।

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