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RTI का उल्लंघन : जब सूचना रोकी जाती है, तो कानून आवेदक के साथ खड़ा होता है

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(CIC, High Court एवं Supreme Court के आवेदक-पक्षीय न्यायिक निर्देशों के आलोक में) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 किसी अधिकारी की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि नागरिक की शक्ति के लिए बनाया गया कानून है। इसके बावजूद आज भी लोक सूचना अधिकारी सूचना को रोकना, टालना या भ्रामक उत्तर देना अपना विशेषाधिकार समझ बैठे हैं।

🔹 Bombay High Court – RTI matters (आवेदक-पक्षीय अवलोकन) अदालत ने माना कि— RTI अधिनियम का पालन न करना
➡️ serious misconduct है
➡️ और नागरिक को न्याय पाने का अधिकार है।

निष्कर्ष : अब तराजू एक तरफ़ा नहीं CIC, High Court और Supreme Court—तीनों का संयुक्त संदेश स्पष्ट है:
RTI आवेदक याचक नहीं, अधिकार-धारक है। सूचना रोकना अब प्रशासनिक गलती नहीं,बल्कि संवैधानिक और आपराधिक उल्लंघन है।
Legal Ambit का स्पष्ट मत है कि अब अपीलों में उलझाने की संस्कृति समाप्त होनी चाहिए औरजहाँ आवश्यक हो—सीधी विधिक कार्यवाही की जाए।

✍️ Adv.महावीर पारीक,Legal_Ambit_जागरूकता

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